
तुलसीदासजी को वृन्दावन में राम-दर्शन-
।। जय रघुनन्दन जय राधेश्याम ।। तुलसीदासजी उस समय वृन्दावन में ही ठहरे थे। वे भंडारों में विशेष रुचि नहीं

।। जय रघुनन्दन जय राधेश्याम ।। तुलसीदासजी उस समय वृन्दावन में ही ठहरे थे। वे भंडारों में विशेष रुचि नहीं

मीरा का मान मीरा का मान रखने के लिये स्वयं श्री कृष्ण ने स्त्री रूप धारण किया। राणा सांगा के

हम भक्ति करना चाहते हैं भक्ति के लिए लक्ष्य का निर्धारित करना आवश्यक है। लक्ष्य क्या है मै भगवान के

वृंदावन में एक बांसुरी बनाने वाला वृद्ध रहता था। हर दिन वह नई बांसुरी गढ़ता, पर कोई भी वैसी धुन

एक भक्त की भगवान से प्रार्थना हे परमात्मा तुम परमेश्वर स्वामी भगवान नाथ हो। हे प्रभु प्राण नाथ तेरी ज्योती

भगवान से अनन्य प्रेम एक ऐसी अमूल्य निधि है, जिसे पाकर संसार की अपार सम्पत्ति, उच्चाधिकार, विशाल वैभव और उच्च-कुल

परिश्रम के पश्चात विश्राम, क्षुधा के पश्चात भोजन और कष्ट के पश्चात सुख का आनन्द मिलता है- इसी प्रकार मिलन

भक्त की एक ही अभिलाषा होती है प्रभु भगवान के दर्शन कैसे हो प्रभु से मिलन हो तभी हृदय शान्त

एक बार एक राजा ने अपने दरबारी मंत्रियों से पूछा, प्रजा के सारे काम मे करता हूँ, उनको अन्न में

भरत जी का कितना अथाह प्रेम था जिसको शब्दों में परिणत करना असंभव सा है । दासत्व भाव में कितना