भक्ति मार्ग (Bhakti Marg)

जीव ईश्वर मिलन

जय हो चिन्मयानंद भगवान चिन्मय हैं अत: उनकी लीलाएं भी चिन्मयी होती हैं। भगवान की तरह गोपियों का स्वरूप भी

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प्रेम  तत्व-रहस्य

परमात्मा या मुक्ति की प्राप्ति के लिये जितने साधन बतलाये गये हैं, उनको आदर देना ही साध्य को आदर देना

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नित्य कर्म

संध्योपासन-संध्योपासन अर्थात संध्या वंदन। मुख्य संधि पांच वक्त की होती है जिसमें से प्रात: और संध्या की संधि का महत्व

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कृष्ण तुम ईश्वर हो

भीष्म चुप रहे , कुछ क्षण बाद बोले,” पुत्र युधिष्ठिर का राज्याभिषेक करा चुके केशव … ?उनका ध्यान रखना ,

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प्रेम काव्य है।

खाली हाथ आये थे और खाली हाथ जाएंगे, इसलिए इस प्रेमपूर्ण संसार में प्रेम किये जा वन्दे, यही साथ जायेगा।

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