
संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा 4
श्री गणेश चतुर्थी व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव तथा माता पार्वती नर्मदा नदी के किनारे

श्री गणेश चतुर्थी व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव तथा माता पार्वती नर्मदा नदी के किनारे

एक समय की बात है कि विष्णु भगवान का विवाह लक्ष्मीजी के साथ निश्चित हो गया। विवाह की तैयारी होने

एक समय की बात है राजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक कुम्हार था। वह मिट्टी के बर्तन बनाता, लेकिन वे

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत करने से घर-परिवार में आ रही विपदा दूर होती है, कई दिनों से रुके मांगलिक कार्य

एक बुढ़िया माई थी। मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। रोज बनाए रोज गल जाए। एक सेठ का

बूंदी नगर में रामदासजी नाम के एक बनिया थे, वे व्यापार करने के साथ-साथ भगवान की भक्ति-साधना भी करते थे

महाराष्ट्र में कृष्णा नदी के किनारे करहाड़ नामक एक स्थान है, वहाँ एक ब्राह्मण रहता था। उसके घर में चार

💥इसीलिए बीच से बंटा है केला का पत्ता, पढ़े रोचक कथा।💥 केले के पत्ते के बंटवारे की यह कथा भगवान

एक बहुरूपिया राज दरबार में पहुंचा, प्रार्थना की- “अन्नदाता बस ₹5 का सवाल है और महाराज से ये बहुरूपिया और

श्रीहरिः।एक गाँव में भागवत कथा का आयोजन किया गया, पण्डित जी भागवत कथा सुनाने आए। पूरे सप्ताह कथा वाचन चला।