
मीरा का मान मीरा का मान रखने के लिये स्वयं श्री कृष्ण ने स्त्री रूप धारण किया। राणा सांगा के

किसी नगर में एक अमीर इंसान रहता था। उसके पास बहुत सारी संपत्ति, बहुत बड़ी हवेली और नौकर-चाकर थे। फिर

पुरी के पास एक छोटा-सा गाँव था — वहाँ एक गरीब लेकिन परम भक्त बालक रहता था, नाम था माधव।

छप्पन भोग का समय था—मंदिर में सुगंध ऐसी फैल रही थी जैसे पूरा जगन्नाथ धाम प्रेम से महक उठा हो।
माओत्से-तुंग ने अपने बचपन की एक छोटी सी घटना लिखी है। लिखा है कि मेरी मां का एक बगीचा था।

एक बार हस्तिनापुर नरेश दुष्यन्त आखेट खेलने वन में गये। जिस वन में वे शिकार के लिये गये
नश्वर पति रति त्यागि कृष्णपदसों रति जोरी।सबै जगतकी फाँस तरकि तिनुका ज्यों तोरी॥निर्मल कुल काँथड़ा धन्य परसा जेहि जाई।करि वृन्दावन-वास

नानक एक मुसलमान नवाब के घर मेहमान थे। नानक को क्या हिंदू क्या मुसलमान! जो ज्ञानी है, उसके लिए कोई

किसी नगर में एक बूढ़ा चोर रहता था। सोलह वर्षीय उसका एक लड़का भी था। चोर जब ज्यादा बूढ़ा हो