
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
श्रीरामचरितमानस- बालकाण्ड ।। छन्द-भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।। लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा

श्रीरामचरितमानस- बालकाण्ड ।। छन्द-भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।। लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा
एक बार एक शिष्य ने अपने गुरू से पुछा- गुरुदेव ये सफल जीवन क्या होता है? गुरु शिष्य को पतंग

एक साधु प्रत्येक घर के सामने खड़ा होकर पुकारता।माई! मुठ्ठी भर मोती देना.. ईश्वर, तुम्हारा कल्याण करेगा.. भला करेगा।’ साधु
ॐ नमः शिवायः एक बार की बात है, देवताओं के राजा इंद्र ने किसानों से किसी कारण से नाराज होकर

एक बार एक राजा ने गाव में रामकथा करवाई और कहा की सभी ब्राह्मणो को रामकथा के लिए आमत्रित किया
भक्त परमात्मा को अनेकों भावों से मनाता हैं। परमात्मा की विनती करते हुए कहता हैं कि हे परमात्मा तुम मेरे
प्रभु रामजी सीता लक्ष्मण और निषादराजके साथ गंगा-पार करके रेतीमें खड़े हैं । सकुचा रहे हैं कि केवटको पार उतारनेकी

माता जानकी ने पूछा कि हनुमान एक बात बताओ !! बेटा तुम्हारी पूंछ नहीं जली आग में और पूरी लंका

जानत प्रीति रीति रघुराई भगवान राम वनवास से आने के बाद माता केकैयी को पश्चाताप की अग्नि में जलते देखते

हे केशव जो व्यक्ति मन को जल्दी वश में न कर सके,वह कैसे सिद्धि प्राप्त कर सकता है वह मुझे