
शपथ राम जी की
एक बार की बात है। गोस्वामी तुलसी दास जी अवध में थे। वे सरयू नदी में स्नान करने आए। जब

एक बार की बात है। गोस्वामी तुलसी दास जी अवध में थे। वे सरयू नदी में स्नान करने आए। जब

मित्रो हमारा अनुरोध है कि आप इस कथा को अवश्य पढ़ें। हम नही जानते ये झूठ या सच लेकिन है

चैतन्य महाप्रभुओं के जीवन की एक बहुत ही हृदयस्पर्शी कथा है, जो प्रेम और विनम्रता की शक्ति को दर्शाती है।

एक दिन श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी जी गण्डकी नदी में स्नान कर सूर्य भगवान को अर्घ दे रहे थे तभी

(हिंदी अर्थ सहित) ॐ नमो भगवते लक्ष्मीनृसिंहाय। क्लीं ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनृसिंहाय नमः स्वाहा। धर्मसंस्थापनार्थाय ज्वालामालावृताय ते।होलिकादहनोद्भासि प्रह्लादरक्षकाय ते नमः।।१।। हे

हे श्री राधे ! मैं आपसे ब्रह्मलोक पर्यन्त के नाशवान सुख एवं पाँचों प्रकार की मुक्तियों की कामना नहीं करता।

अतुलित बल नर केहरि दोऊ॥बिरही इव प्रभु करत बिषादा।कहत कथा अनेक संबादा॥॥भावार्थ:- श्री रामचंद्रजी ने उस वन को भी छोड़

एक व्यक्ति रामकृष्ण के पास आया। वह लंबे समय तक हिमालय में रहा था। उसने रामकृष्ण के बारे में सुना


सती राजमति द्वारा नेमजी के तोरण पर आकर लौट जाने पर स्वयं द्वारा संसार त्याग कर संयम पथ धारण करने