
समाधि की अवस्था
समाधि की अवस्था विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों एवं साधु संतों के लिए अपने ध्येय को प्राप्त करने की सर्वोत्कृष्ट अवस्था है l

समाधि की अवस्था विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों एवं साधु संतों के लिए अपने ध्येय को प्राप्त करने की सर्वोत्कृष्ट अवस्था है l

जिस देह पर तुम हँसते हो,उसे ईश्वर ने स्वयं गढ़ा है।हांडी टेढ़ी हो तो दोष कुम्हार का होता है।— ऋषि

मीरा का मान मीरा का मान रखने के लिये स्वयं श्री कृष्ण ने स्त्री रूप धारण किया। राणा सांगा के

किसी नगर में एक अमीर इंसान रहता था। उसके पास बहुत सारी संपत्ति, बहुत बड़ी हवेली और नौकर-चाकर थे। फिर

पुरी के पास एक छोटा-सा गाँव था — वहाँ एक गरीब लेकिन परम भक्त बालक रहता था, नाम था माधव।

भरत जी का कितना अथाह प्रेम था जिसको शब्दों में परिणत करना असंभव सा है । दासत्व भाव में कितना

एक भक्त अंतर्मन से भाव में है अन्तर्मन से भगवान का सतसंग चल रहा है भक्त भाव मे गहरा चला

छप्पन भोग का समय था—मंदिर में सुगंध ऐसी फैल रही थी जैसे पूरा जगन्नाथ धाम प्रेम से महक उठा हो।

माओत्से-तुंग ने अपने बचपन की एक छोटी सी घटना लिखी है। लिखा है कि मेरी मां का एक बगीचा था।