
हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास
सुंदरकांड पढ़ते हुए 25 वें दोहे पर ध्यान थोड़ा रुक गया* । तुलसीदास ने सुन्दर कांड में, जब हनुमान जी

सुंदरकांड पढ़ते हुए 25 वें दोहे पर ध्यान थोड़ा रुक गया* । तुलसीदास ने सुन्दर कांड में, जब हनुमान जी

. क्षीरसागर में भगवान विष्णु शेष शैया पर विश्राम कर रहे हैं और लक्ष्मी जी उनके पैर दबा रही हैं।

आज के विचार (श्री रामराज्याभिषेक के दिन…)भाग-40 अपने वश करि राखे रामू…(गो. श्रीतुलसी दास) आहा ! मेरे आराध्य की भूमि…

*रावण रथी विरथ रघुवीरा, देखि विभीषण भयहु अधीरा**अधिक प्रीति मन भा सन्देहा, देखि विभीषण भयहु अधीरा**अधिक प्रीति मन

रामायण की चोपाई के माध्यम से कुछ जीवन के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र दिए जा रहे है जिनके जाप से सत्-प्रतिशत

बाल काण्ड।। 1,,भरत सुभाउ सुसीतलताई,सदा एकरस,बरनि न जाई ।। 2,,भरत सत्रहुँन दूनऊं भाई ,प्रभु सेवक जसि प्रीति बडाई ।। 3,,

जिन पंक्तियों के माध्यम से संत तुलसीदास पर ” शूद्र एवं नारी अवमानना ” के आरोप लगते रहे हैं ,

हमारे जीवन में सुख-दुख का आना-जाना लगा ही रहता है. यदि सुख है तो दुख भी आएंगे ही. इसलिए हमें

किसी भी प्रकार की मशीन हो मशीन को चलाते रहेगें तब वह कार्य करती है। मशीन को कुछ समय नहीं

विवाह की कामना लेकर नारद जी वापस बैकुंठ गए और विष्णुजी से खुद को रूपवान बनाने की विनती की। श्रीहरि