
।। प्रभु दर्शन की उत्कट आकांक्षा ।।
तत्त्व के साक्षात्कार के लिए सम्पूर्ण प्रयास होते हैं। तत्त्व जिज्ञासा होने के बाद ही श्रवण-मननादि होता है और भगवत्तत्त्व

तत्त्व के साक्षात्कार के लिए सम्पूर्ण प्रयास होते हैं। तत्त्व जिज्ञासा होने के बाद ही श्रवण-मननादि होता है और भगवत्तत्त्व

।। श्रीहरि: ।। सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलंसपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम्।सहारवक्षस्स्थलशोभिकौस्तुभंनमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम्।। अनंत, वासुकी, शेषं, पद्मनाभं च कम्वलं।शंखपालं, धृतराष्ट्रकंच, तक्षकं, कालियं तथा।। एतानि

एक बच्चा प्रतिदिन अपने दादा जी को सायंकालीन पूजा करते देखता था। बच्चा भी उनकी इस पूजा को देखकर अंदर

हनुमत तेरी बंदगी, करता सब संसार|राम नाम के जाप से,मिटते कष्ट हजार || ईश्वर वंदन भक्ति का, मिले हमें वरदान

एक बार पुरा गणित लगाकर देख ले आश्चर्य चकित हो जाएंगे।: अद्भुत गणितअदभुत गणितज्ञ “श्री तुलसीदासजी से एक भक्त ने

विशेष – आज की पंचमी को रंग-पंचमी कहा जाता है. उत्तर भारत में विशेषकर मध्य-प्रदेश, राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में

आशुतोष सशाँक शेखर चन्द्र मौली चिदंबरा, कोटि कोटि प्रणाम शम्भू कोटि नमन दिगम्बरा, निर्विकार ओमकार अविनाशी तुम्ही देवाधि देव ,जगत

*हे सच्चिदानंद स्वरुप, हे सर्वाधार सर्वेश्वर, सर्वव्यापक,सर्व अंतर्यामी आपके चरणों में हमारा प्रणाम स्वीकार हो।* हे अजर,अमर,अभय, नित्य पवित्र,शुद्ध-बुद्ध,मुक्त स्वभाव!

यह संसार रंगभरा है। प्रकृति की तरह ही रंगों का प्रभाव हमारी भावनाओं और संवेदनाओं पर पडता है। जैसे क्रोध

धाए धाम काम सब त्यागी।मनहु रंक निधि लूटन लागी।।जनकपुर के निवासियों को जब पता चला कि भूप सुत यानि प्रभु