
पंचाध्यायी–महारासलीला पोस्ट – 05
. (अन्तिम) महारास गोपियाँ भगवान की इस प्रकार प्रेम भरी सुमधुर वाणी सुनकर जो कुछ विरहजन्य ताप शेष था, उससे

. (अन्तिम) महारास गोपियाँ भगवान की इस प्रकार प्रेम भरी सुमधुर वाणी सुनकर जो कुछ विरहजन्य ताप शेष था, उससे

भगत कबीर जी की बेटी की शादी का समय नजदीक आ रहा था।सभी नगर वासीयों में काना फूसी चल रही

अन्न के सम्मान का संदेश है नवरात्रि पूजा में जवारे बोना नवरात्रि के दिनों में जवारों की पूजा का बहुत

. गोपिकागीत गोपियाँ विरहावेश में गाने लगीं–‘प्यारे! तुम्हारे जन्म के कारण वैकुण्ठ आदि लोकों से भी व्रज की महिमा बढ़

|| श्री हरि: || गत पोस्ट से आगे………..राजा परीक्षित ने पूछा – भगवन ! मनुष्य राजदण्ड, समाजदण्ड आदि लौकिक और

राजा परीक्षित ने कहा – भगवन ! आप पहले (दिव्तीय सकन्ध में) निवृतिमार्ग का वर्णन कर चुके हैं तथा यह

. श्रीकृष्ण के विरह में गोपियों की दशा भगवान् को न देखकर व्रज युवतियों की वैसी ही दशा हो गयी,

. रासलीला का आरम्भ शरद् ऋतु थी। उसके कारण बेला, चमेली आदि सुगन्धित पुष्प खिलकर महक रहे थे। भगवान ने

एक बार एक सम्राट एक साधु से बहुत प्रभावित हो गए। सम्राट रोज रात को अपने घोड़े पर सवार होकर

श्री समर्थ रामदास स्वामी एक दिन अपने शिष्यों के साथ यात्रा पर निकले थे।.दोपहर के समय एक बड़े कुएँ के