
नील सरस्वती स्तोत्रम्
घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि।भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।१।। ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।२।। जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि

घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि।भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।१।। ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।२।। जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि
नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नमः।गवां बीज स्वरूपायै नमस्ते जगदम्बिके।।१।। नमो राधा प्रियायै च पद्मांशायै नमो नमः।नमः कृष्ण प्रियायै

।। जय छठ मैया की, षष्ठी देवी स्तोत्र ।। नमो देव्यै महादेव्यै सिद्ध्यै शान्त्यै नमो नम:।शुभायै देवसेनायै षष्ठी देव्यै नमो

।। श्रीकृष्णरासेश्वर- स्तोत्रम् ।।(शरदपूर्णिमा विशेष) विनियोग-ॐ अस्य श्रीकृष्णरासेश्वर-स्तोत्रस्य नारद ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः, श्रीरासेश्वरः श्रीकृष्णो देवता, “क्लीं” बीजं, “ह्रीं” शक्तिः, “श्रीं” कीलकम्,

इंद्रादि देवताओं के बाद धरती पर सर्वप्रथम विभीषण ने ही हनुमानजी की शरण लेकर उनकी स्तुति की थी। विभीषण को

।। भगवती स्तोत्रम् ।। महर्षि व्यास द्वारा लिखा गया मां दुर्गा का यह स्तोत्र कल्याणकारी है। इसका पाठ करने से

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिंगं निर्मलभासितशोभित लिंगम् ।जन्मजदुःखविनाशकलिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम् ॥१॥ देवमुनिप्रवरार्चितलिंगं कामदहं करुणाकरलिंगम् ।रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम् ॥२॥ सर्वसुगंधिसुलेपितलिंगं बुद्धिविवर्धनकारणलिंगम् ।सिद्धसुरासुरवंदितलिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम्

नागेन्द्रहाराय ,त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,तस्मै

अयि गिरिनंदिनि नंदितमेदिनि विश्वविनोदिनि नंदनुतेगिरिवरविंध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।भगवति हे शितिकण्ठकुटुंबिनि भूरिकुटुंबिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।। सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरतेत्रिभुवनपोषिणि

मंगला गौरी स्तोत्र देवी पार्वती जी के मंगलमयी स्वरूप- मंगला गौरी- को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और मंगलकारी स्तोत्र है।