बोध कथा (Bodh Katha)

मै हृदय का सेठ हूं

मन को  पुण्य में प्रवृत्त रखना यही मानव जीवन का सबसे बड़ा पुरुषार्थ है। एक बहुत अमीर सेठ थे। एक

Read More...

हम सब अजनबी हैं।

इस संसार के रास्ते पर  हम सब अजनबी हैं।घड़ीभर का मिलना है, फिर रास्ते अलग हो जाते हैं। घड़ीभर साथ चल

Read More...