
प्रकाण्ड विद्वान अष्टावक्र
अष्टावक्र इतने प्रकाण्ड विद्वान थे कि माँ के गर्भ से ही अपने पिताजी “कहोड़” को अशुद्ध वेद पाठ करने के

अष्टावक्र इतने प्रकाण्ड विद्वान थे कि माँ के गर्भ से ही अपने पिताजी “कहोड़” को अशुद्ध वेद पाठ करने के

गौ सेवा का फल आज से लगभग 8 हजार वर्ष पूर्व त्रेता युग में अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट महाराज दिलीप

प्रथम राम राम मेरे भगवान् तुमको करती हूं। हे परमात्मा तुम मेरी आत्मा के स्वामी हो। हे परम पिता परमात्मा

!!! १६ वर्षीय संत ज्ञानेश्वर के १४०० वर्षीय शिष्य चांगदेव महाराज की कहानी !!! यह कहानी महाराष्ट्र के महान संत

एक बार यमराज ने अपने यमदूतों से प्रश्न किया, “क्या कभी प्राणियों के प्राण लेते समय तुम्हें किसी पर दया

‘हे भारत ! तू सर्वभाव से उस परमात्मा की शरण जा, उसकी कृपा से तू परम शान्ति को, अविनाशी स्थान
एक साहूकार था जिसके सात बेटे, सात बहुएं और बेटी थी। सब कोई मिट्टी लेने गई तो मिट्टी खोदते समय

आज का प्रभु संकीर्तन।भगवान श्री कृष्ण कहते हैं मेरे सच्चे भक्त वही होते हैं जो कुछ लेने में नही देने

जॉन डी रॉकफेलर दुनिया के सबसे अमीर आदमी और पहले अरबपति थे। 25 साल की उम्र में, वे अमेरिका में

भक्त मोरया गोस्वामी कर्नाटक के एक छोटे से गांव से थे, वे गणेश जी के परम भक्त थे, हर जीव