
प्रह्लाद जानी का जन्म 13 अगस्त 1929 को हुआ
प्रह्लाद जानी का जन्म 13 अगस्त 1929 को भारत के चरदा गांव (अब मेहसाणा जिला, गुजरात , भारत) में हुआ

प्रह्लाद जानी का जन्म 13 अगस्त 1929 को भारत के चरदा गांव (अब मेहसाणा जिला, गुजरात , भारत) में हुआ

ऐसी सत्य घटना साझा कर रहे हैं, जिसे पढ़ते ही हृदय भगवान के लिए व्याकुल हो जाये..?? दिनांक: 1 नवंबर

भाव का भूखा हूँ मैं और भाव ही एक सार है।भाव से मुझको भजे तो भव से बेड़ा पार है।।भाव

भगवान परशुराम जी का सुंदर चित्र जब वह अपनी नन्दिनी को आतताईयों से छूडाकर लाते हैं… सबसे बड़े गौ रक्षक

हरि शरण में सब सशंय मिट जाते हैं। यदि जीवन भर किसी ने भगवान की भक्ति नहीं की, शरण ग्रहण

मंद मंद बारिश होने लगी है। अर्ध रात्रि का समय है। देवकी और वसुदेव के हाथ-पैरो की बेड़ियां खुल गई

जन्माष्टमी का त्यौहार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मथुरा नगरी में असुरराज कंस के कारागृह

ज्ञानवापी मंदिर के बारे मे विस्तृत जानकारी पुराणों के अनुसार, ज्ञानवापी की उत्पत्ति तब हुई थी जब धरती पर गंगा

हे नाथ, हे मेरे नाथ, मैं तुम्हें भूलूं नहीं, कभी न भूलूं तुझे, बस इतनी दया रखना हे नाथ मैं

. “ एक समय नारद जी यह जानकर की, भगवान् श्री कृष्ण ब्रज में प्रकट हुए हैं वीणा बजाते हुए