
मानवता
एकमेलके युद्धके बाद नेपोलियन आस्ट्रियाकी राजधानी वियना नगरके पास पहुँचे। उन्होंने संधिका झंडा लेकर एक दूत नगरमें भेजा; किंतु नगरके

एकमेलके युद्धके बाद नेपोलियन आस्ट्रियाकी राजधानी वियना नगरके पास पहुँचे। उन्होंने संधिका झंडा लेकर एक दूत नगरमें भेजा; किंतु नगरके

(3) इसे तो फर्क पड़ेगा न ! एक झेनगुरु समुद्रतटपर टहल रहे थे। तभी जोरका तूफान आया और समुद्रकी लहरोंके

श्रीरामकृष्ण परमहंसदेवके अनुगतोंमें श्रीदुर्गाचरणजी नाग प्रायः नाग महाशयके नामसे जाने जाते हैं। इनके घरकी स्थिति अच्छी नहीं थी। पिता नौकरी

अभिभावकोंको चाहिये कि संतानको सुसंस्कार दें पूर्वकालमें मृत्युदेवके एक कन्या उत्पन्न हुई थी, जिसका नाम सुनीथा रखा गया था। वह

सीख एक गुरुकी उत्तर भारतके पहाड़ी इलाकेमें एक गुरुका आश्रम था। उनके पास सुदूर क्षेत्रोंसे शिष्य शिक्षा ग्रहण करने आते

ऐसा प्रायः देखा जाता है और संतोंके जीवन वृत्तान्तसे पता चलता है कि बड़े-बड़े संत विज्ञापन, प्रचार और प्रसिद्धिसे दूर

श्रीधाम पुरीके ‘बड़े बाबाजी’ सिद्ध श्रीरामरमण दासजीके विद्यार्थी जीवनका नाम राइचरण था। उस समय इनकी अवस्था दस-बारह वर्षकी थी। इस

ईश्वर सब देखता है इंग्लैण्डके एक महानगरमें शेक्सपियरका कोई नाटक चल रहा था। बहुत वर्षों पहले सज्जनोंके लिये नाटक देखना

एक श्रेष्ठ नारी थी। माता-पिता भगवद्भक्त थे, उन्होंने पुत्रीको उत्तम शिक्षा दी थी। विवाह हो जानेपर पतिगृह आकर उसने सोचा-

मित्रकी माता धर्मतः माता होती है एक बार अयोध्यानरेश श्रीराम, लक्ष्मण और सुग्रीवके साथ लंकापुरी आये। राजा विभीषणका मन्त्रिमण्डल और