
शौर्यका सम्मान
दक्षिण भारतका बहुत छोटा-सा राज्य था बल्लारी उसका शासक कोई वीर पुरुष नहीं था, एक विधवा नारी थी। परंतु वह

दक्षिण भारतका बहुत छोटा-सा राज्य था बल्लारी उसका शासक कोई वीर पुरुष नहीं था, एक विधवा नारी थी। परंतु वह

‘दक्षिणेश्वर मन्दिरके परमहंसदेव समर्थ हैं मेरी विपत्ति दूर करनेके लिये। वे मुझे कितना चाहते हैं!’ नरेन्द्र (विवेकानन्द) – ने दक्षिणेश्वर

माँ ईश्वरका प्रतिरूप है डॉo Wayne Dyer ( वायने डायर) का ‘Your Sacred Self (योर सैक्रेड सेल्फ) में दिया निम्नलिखित

श्रीरामका न्याय लंकाके निरंकुश शासक रावणको मारकर उसके धर्मनिष्ठ भाई विभीषणको राजपदपर अभिषिक्त करके महाराज श्रीराम अयोध्या लौट आये और

बादशाहकी सवारी निकली थी। मार्गके समीप वृक्षके नीचे एक अलमस्त फकीर लेटे थे अपनी मस्तीमें। बादशाह धार्मिक थे, श्रद्धालु थे,

सवारने एँड़ लगायी और घोड़ा रुक गया भैंसावा ग्रामकी सीमापर। “समुझि लेओ रे मना भाई। अंत न होइ कोई आपना

ईश्वरका सच्चा भक्त एक महापुरुषने रातको स्वप्नमें एक देवदूतको कुछ लिखते देखा। उसने पूछा-‘देव! आप इस सुन्दर ग्रन्थमें क्या लिख

जब भगवान् विष्णुने वामनरूपसे वलिसे पृथ्वी तथा स्वर्गका राज्य छीनकर इन्द्रको दे दिया, तब कुछ ही दिनोंमें राज्यलक्ष्मीके स्वाभाविक दुर्गुण

संवत् 1700 के लगभग जैसलमेर राज्यान्तर्गत वारू ग्राममें चौहान क्षत्रिय माधवसिंहजी हुए थे स्वभावसे बहुत ही रजोगुणी थे। डाकुओंका संघटन

एक व्यक्ति शिकारके लिये जंगलमें गया। वहाँ उसने एक हरिनीको देखा। उसके साथ छोटा बच्चा था। शिकारी दौड़ा, हरिनी तो