
भक्ता श्रीवारमुखीजी
गणिका थीं श्रीवारमुखीजी। लोक और वेद-दोनोंसे गर्हित था उनका कर्म परंतु प्रभुकी कृप किसपर हो जाय, कब किसके किस जन्मका

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एक बार बुद्ध एक नगर के बाजार से गुजर रहे थे। तभी एक व्यक्ति उनके पास आया और बुद्ध को

|शुक्राचार्य की पुत्री #देवयानी की प्रेम कहानीशुक्राचार्य की पुत्री देवयानी के प्रेम और विवाह की ये कहानी बहुत ही रोचक

.बात है प्रभु श्री कृष्ण के बाल्यकाल की। कन्हैया को माखन चोरी का बहुत शौक था।.सब गोप ग्वालो के साथ

जब कभी एक बार भी बिना निमित्त के तुम अपने से जुड़ जाते हो, तो घटना घट गई। कुंजी मिल

आपकी बातें अनेकों को अप्रिय क्यों लगती हैं? सुननेवाले पर निर्भर है। तुम अगर सच में ही सत्य की खोज

स्वामी उग्रानन्दजी बहुत अच्छे सन्त थे। आप बड़े सहिष्णु तथा सर्वत्र भगवद्बुद्धि रखने वाले थे। एक बार आप

.एक बार एक स्वामी जी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी,.भीक्षा दे दे

एक गांव में गरीब ब्राह्मण था।।उसे अपनी कन्या का विवाह करना था।। उसने विचार किया कि राम कथा करने से

एक व्यक्ति अपने गुरु के पास गया और बोला, गुरुदेव, दुख से छूटने का कोई उपाय बताइए। शिष्य ने थोड़े