
मेहनतकी कमाई और उचित वितरणसे प्रसन्नता
एक राजा जंगलके रास्ते कहीं जा रहा था। उसने देखा एक खेतमें एक जवान आदमी हल जोत रहा है। और

एक राजा जंगलके रास्ते कहीं जा रहा था। उसने देखा एक खेतमें एक जवान आदमी हल जोत रहा है। और

श्री ईश्वरचन्द्र विद्यासागर अपने मित्र श्रीगिरीशचन्द्र विद्यारत्नके साथ बंगालके कालना नामक गाँव जा रहे थे। मार्गमें उनकी दृष्टि एक लेटे

विजयके लिये सेनापति आवश्यक एक समयकी बात है। हैहयवंशी क्षत्रियोंने अपने प्रचण्ड पराक्रमसे अलौकिक समृद्धि अर्जित की। उनकी इस विपुल

गौड़ेश्वर वत्सराजका मन राजा मुञ्जके आदेश पालन और स्वकर्तव्य – निर्णयके बीच झूल रहा था। वह जानता था कि यदि

स्वर्गीय महामहोपाध्याय पं0 श्रीविद्याधरजी गौड़ श्रुति स्मृति प्रतिपादित सनातन वैदिक धर्मके परम अनुयायी थे। कई ऐसे अवसर आये, जिनमें धार्मिक

अधिक तृष्णा नहीं करनी चाहिये किसी वन-प्रदेशमें एक भील रहा करता था। वह बहुत साहसी, वीर और श्रेष्ठ धनुर्धर था।

किसीका दिल मत दुखाओ गर्मियोंके दिनोंमें एक शिष्यने अपने गुरुसे सप्ताह भरकी छुट्टी लेकर गाँव जानेका निर्णय किया। तब गाँव

एक महात्मा एक स्कूलके आगे रहा करते थे। एक दिन स्कूलके लड़कोंने उनको तंग करनेकी सोची। बस, एक लड़का आकर

सर प्रभाशङ्कर पट्टनी लंदनकी सहकपर पैदल निकले थे। भारतीय वेश, लंबी दाढ़ी और हाथमें मोटा सोटा लिये यह भारतीय बुड्डा

एक व्यापारीके दो पुत्र थे। एकका नाम था धर्मबुद्धि, दूसरेका दुष्टबुद्धि । वे दोनों एक बार व्यापार करने विदेश गये