
गाँधीजीके तनपर एक लंगोटी ही क्यों
सन् 1916 की बात है। लखनऊ में कांग्रेसका महाधिवेशन था। गांधीजी उसमें सम्मिलित होने आये थे। वहाँ राजकुमार शुक्लद्वारा किसानोंकी

सन् 1916 की बात है। लखनऊ में कांग्रेसका महाधिवेशन था। गांधीजी उसमें सम्मिलित होने आये थे। वहाँ राजकुमार शुक्लद्वारा किसानोंकी

एथेनियन कवि एगोथनने अपने यहाँ एक बार एक विशाल भोजका आयोजन किया था। इस व्यक्तिको ग्रीक थियेटरमें प्रथम पुरस्कार प्राप्त

एक बार एक पुण्यात्मा गृहस्थके घर एक अतिथि आये उसके शरीरपर सारे कपड़े काले थे। गृहस्थने तनिक खिन्नतासे कहा- तुमने

कन्नौजके महामहिम शासक महाराज हर्षकी कृपासे मातृगुप्तका काश्मीरके सिंहासनपर राज्याभिषेक हुआ मातृगुप्तकी उदारता, काव्यप्रियता और दानशीलतासे आकृष्ट होकर बड़े-बड़े विद्वानों,

अति साहस करना ठीक नहीं एक कछुआ यह सोचकर बड़ा दुखी था कि पक्षीगण बड़ी आसानीसे आकाशमें उड़ा करते हैं,

किसी गाँव में एक गरीब विधवा ब्राह्मणी रहती थी। तरुणी थी। सुन्दर रूप था । घरमें और कोई न था

‘चिरकारी प्रशस्यते’ महर्षि गौतम (मेधातिथि) के एक चिरकारी नामवाला पुत्र था, जो बड़ा बुद्धिमान् था। वह किसी कार्यपर बहुत देरतक

चक्रवर्ती सम्राट् भरतकी धारणा थी कि वे समस्त भूमण्डलके प्रथम चक्रवर्ती हैं-कम-से-कम वे ऐसे प्रथम चक्रवर्ती हैं, जो वृषभाचलपर पहुँच

चित्तकी वासनाओंसे मुक्तिका उपाय हम अकसर यह सोचते हैं कि भजन करनेसे पूर्व हमारा चित्त पूर्णरूपसे निर्द्वन्द्व हो जाय और

एक साधुने ईश्वरप्राप्तिकी साधनाके लिये कठिन तप करते हुए छ: वर्ष एकान्त गुफामें बिताये और प्रभुसे प्रार्थना की कि ‘प्रभो!