
भक्त विमलतीर्थ
एक नैष्ठिक भक्त पण्डित थे। भक्त विमलतीर्थ उनके ही पुत्र थे। पिताने बाल्यकालमें इन्हें यथाविधि यज्ञोपवीतादि संस्कारोंसे संस्कृत कर दिया।

एक नैष्ठिक भक्त पण्डित थे। भक्त विमलतीर्थ उनके ही पुत्र थे। पिताने बाल्यकालमें इन्हें यथाविधि यज्ञोपवीतादि संस्कारोंसे संस्कृत कर दिया।

माताके सत्संगका गर्भस्थ शिशुके जीवनपर प्रभाव भक्तश्रेष्ठ प्रह्लादजीको दैत्यराज हिरण्यकशिपु भगवान्के स्मरण-भजनसे विरत करना चाहता था। उसकी धारणा थी कि

चीनके एक बादशाहके शासन कालमें प्रजाको अनेक प्रकारके कर देने पड़ते थे। बाहरसे आनेवाली वस्तुओंपर बड़ा शुल्क देना पड़ता था।

एक वीतराग संतका दर्शन करने वहाँके नरेश पधारे। साधु कौपीन लगाये भूमिमें ही अलमस्त पड़े थे। नरेशने पृथ्वीपर मस्तक रखकर

पूर्वानुमानका महत्त्व एक राजाको बन्दर पालनेका शौक था। उसका वह शौक ही उसका मनोरंजन था। वह समस्त प्रकारके बन्दरोंको एकत्रित

बोध-पीयूष-बिन्दु क्रियासिद्धिः सत्त्वे वसति महतां नोपकरणे॥ (हनुमन्नाटक 7/7) महापुरुषोंके कार्योंकी सफलता साधनोंमें नहीं, अपितु उनके आत्मबलमें निवास करती है। मनसि

बोध-सूक्ति- पीयूष ‘अनिर्वेदः सिद्धेर्मूलम् ॥’-निराशाका अभाव हो सफलताका मूल है। ‘न सन्देहदेहो वीरव्रतनिर्वाहः ॥ ‘ – वीरोचित आचरण संशयग्रस्त मनसे

नगरका नाम और ठीक समय स्मरण नहीं है। वर्षा ऋतु बीती जा रही थी; किंतु वर्षा नहीं हुई थी। किसानों

23 मार्च 1931 की रातमें लाहौर जेलमें भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरुको श्रीगांधीजी आदिकी लाख चेष्टाके बाद भी फाँसी दे

(2) ऐसे सेवाभावी थे सन्त दादू सन्त दादू जयपुरसे दूर एक जंगलमें ठहरे थे। उनकी ख्याति सुनकर शहरके कोतवाल घोड़ेपर