
जीवन की उपलब्धि
बाहर से हारकर भी जिसने स्वयं को जीत लिया वह सम्राट है लेकिन दुनिया जीतकर भी जो स्वयं से हार

बाहर से हारकर भी जिसने स्वयं को जीत लिया वह सम्राट है लेकिन दुनिया जीतकर भी जो स्वयं से हार

मेरा परमात्मा भगवान् कैसा है। मेरा परम पिता परमात्मा मेंरा जगत जगदीश प्रकाश का पूंज है।जिसमें सम्पूर्ण जगत समाया हुआ

हरि ॐ तत् सत् जय सच्चिदानंद चाहे पूरी पृथ्वी को दीपकों से सजा दो फिर भी तुम्हारे हृदय में रोशनी

एकनाथ महाराज के पास एक वैष्णव आया। उसने महाराज को पूछा कि आपका मन ईश्वर में,सदासर्वदा श्रीकृष्ण में कैसे स्थिर

जब हम ‘राधाकृष्ण’ शब्द सुनते हैं तो हमारे मन में प्रेम, भक्ति और परीकथाओं का सौंदर्य बह जाता है। परन्तु

भगवान शिव का पाशुपतास्त्र एक अमोघ अस्त्र माना जाता है। बात उस समय की जब हस्तिनापुर के कार्यकारी महाराज धृतराष्ट्र

भगवान शिव का पाशुपतास्त्र एक अमोघ अस्त्र माना जाता है। बात उस समय की जब हस्तिनापुर के कार्यकारी महाराज धृतराष्ट्र

एक भक्त भगवान से अन्तर्मन से प्रार्थना करते हुए कहता है कि हे परमात्मा मेरे सब कुछ आप ही है आप

कृष्ण मिलन यज्ञ में श्रद्धा पत्नी है ,आत्मा यजमान ,शरीर यज्ञ भूमि और फल परमात्मा विष्णु से मिलन,परमात्मा से मिलन

अपने निवास स्थान योगेश भवन से निकलकर नजदीक ही स्थित भंवरताल पार्क की ओर जाने लगा। मेरी वह चाल ही