
अपना कोई नहीं है
आत्मा का अपना कोई नहीं होता सम्बन्ध शरीर का है आत्मा का नहीं। यह मत सोचो कि तुम्हारी मृत्यु के

आत्मा का अपना कोई नहीं होता सम्बन्ध शरीर का है आत्मा का नहीं। यह मत सोचो कि तुम्हारी मृत्यु के

परमात्मा को प्रणाम है एक दीपक प्रज्वलित करके भगवान् को अन्तर मन से धन्यवाद करे कि हे भगवान् तुमने मुझे

हे भगवान नाथ, आज मैं तुम्हें कैसे नमन और वंदन करूं। आज ये दिल ठहर-ठहर कर भर आता है। ऐसे
ध्यान में परमात्मा के चिन्तन के अलावा कुछ भी नहीं है। भगवान को हम शरीर रूप से भजते भगवान को

प्रभु से बात दिल की गहराई से की जाती है। आंखें आंसू तभी बहाती है। जब परमात्मा से सम्बंध बन

दिल के भावसच्चे भक्त के दिल की एक ही पुकार होती है कि किस प्रकार मेरे स्वामी भगवान् नाथ का
सत्संग कैसे होएक भक्त अपने अन्तर्मन को पढता है देखता है मै अब खाली मटका हू भरा हुआ मटका बोलता

भक्ति करते हुए भक्त कर्म को उत्सव की भांति देखता भक्त देखता है कर्म करते हुए जितने शुद्ध भाव प्रभु

वासुदेव सरवम पर प्रकाश डालते हैं वासुदेव सरवम को गहराई से समझगें तभी गीता ज्ञान को समझ सकते हैं। वासुदेव

दीपक दिपावली काहमारे मन की पवित्रता ही दिपावली है शान्ति ही अयोध्या नगरी है। हमे मन मन्दिर को सजाना है