बिना ज्ञान के मुक्ति नहीं
बिना ज्ञान के मुक्ति नहींमै का मर जाना ही ज्ञान है। कर्ता का मिटना ज्ञान है। भगवान की भक्ति करते
बिना ज्ञान के मुक्ति नहींमै का मर जाना ही ज्ञान है। कर्ता का मिटना ज्ञान है। भगवान की भक्ति करते

ऐ आत्मा! ये शरीर तेरा घर नहीं है। ऐ आत्मा! तुझे परम तत्व परमात्मा से साक्षात्कार करना है। ऐ आत्मा,

आज का युग भौतिक पदार्थों में खुशी ढुंढता है। वह बाहर की खुशी के साथ जीवन जीते हैं उनकी कल्पना

फुलो की महक सांसो में समा जाए मन भरा हुआ ही हंसता है खाली मन हंसा नहीं करता है ।

कभी-कभी यह भ्रम सहज रूप से मन में आता है कि जो जगत मुझे चारों ओर प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा

मनुष्य शरीर कर्म करने के लिए बना है। कर्म करना और फल की इच्छा न करना हीनिष्काम कर्म-योग यानि भक्ति-योग

मृत्यु यात्रा है आत्मा चोले का नव निर्माण करती है।आत्मा के लिए शरीर का बदलाव वस्त्र बदलने के समान है।

मनुष्य शरीर कर्म करने के लिए बना है। कर्म की हम कितनी बाते करे कर्म को शुद्ध रूप से किये

आज का समय ऐसा है हर कोई अपनी आजादी और अपने सुख चाहता है। हम जीवन को समझते नहीं है।
मै शरीर नहीं हूं शरीर मेरा नही है शरीर से ऊपर उठना ही साधना है जब तक साधक मे मै