
कर्म बीज
राधे राधे यह हमारा शरीर ही क्षेत्र है | इस खेत में कर्मरूप जैसा बीज बोया जायगा वैसा ही

राधे राधे यह हमारा शरीर ही क्षेत्र है | इस खेत में कर्मरूप जैसा बीज बोया जायगा वैसा ही

मृत्यु यात्रा है आत्मा चोले का नव निर्माण करती है। मृत्यु वैराग्य और अध्यात्मिकता को प्रकट करती है जीवन आनंद
हम मन्दिर में भगवान् से प्रार्थना करने आते हैं। हमारी आन्तरिक प्रार्थना होती है कि हे प्रभु प्राण नाथ स्वामी

परब्रह्म परमात्मा को हम सर्वशक्तिमान सर्व गुण समपन अनादि सत्य स्वरूप माने परमात्मा सृष्टि का रचियता पालन हार और संहारक

हमे अंग संग खङे प्रभु भगवान श्री हरि की खोज करनी है। उस ज्योति में समाना है जो हमारे भीतर

वासुदेव सरवम भागवत गीता में आता है वासुदेव सरवम हम अध्यात्म की बात करते हैं तब भी वासुदेव सर्वम कहा

भगवान नाम जप से हमारे भीतर से धीरे धीरे संसार छुटने लगता है । हमे जब भी समय मिले चिन्तन

हम भगवान का नाम जप आसन पर बैठकर माला लेकर करते हैं। राम राम राम जपती रहती। जब भी समय
जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है। परमात्मा को साथ रखते हुए यदि हम किसी से प्रेम करते हैं

मेरा परमात्मा भगवान् कैसा है। मेरा परम पिता परमात्मा मेंरा जगत जगदीश प्रकाश का पूंज है।जिसमें सम्पूर्ण जगत समाया हुआ