
तुलसीदासजी को वृन्दावन में राम-दर्शन-
।। जय रघुनन्दन जय राधेश्याम ।। तुलसीदासजी उस समय वृन्दावन में ही ठहरे थे। वे भंडारों में विशेष रुचि नहीं

।। जय रघुनन्दन जय राधेश्याम ।। तुलसीदासजी उस समय वृन्दावन में ही ठहरे थे। वे भंडारों में विशेष रुचि नहीं

वृंदावन में एक बांसुरी बनाने वाला वृद्ध रहता था। हर दिन वह नई बांसुरी गढ़ता, पर कोई भी वैसी धुन

. आज ब्रज में बहुत बड़ा उत्सव सा हो रहा है। जहाँ देखो तहाँ ब्रजवासी गीत गाने में मगन

राधा रानी की शक्ति गोवर्धन लीला के बाद समस्त ब्रजमंडल के कृष्ण के नाम की चर्चा होने लगी, सभी ब्रजवासी

हे तेजोमय परमेश्वर ! हमें इस संसार की यात्रा में सफलता के लिए सुपथ पर चलाइये | हमारी दुर्बलताओं को

अजर अमर गुणनिधि सुत होहू। जानकी माता ने कहा कि हनुमान एक बात बताओ बेटा तुम्हारी पूंछ नहीं जली आग
।। श्रीकृष्णरासेश्वर- स्तोत्रम् ।।(शरदपूर्णिमा विशेष) विनियोग-ॐ अस्य श्रीकृष्णरासेश्वर-स्तोत्रस्य नारद ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः, श्रीरासेश्वरः श्रीकृष्णो देवता, “क्लीं” बीजं, “ह्रीं” शक्तिः, “श्रीं” कीलकम्,

भगवान् श्रीकृष्ण ही परम पुरुष तथा सर्वतन्त्र स्वतन्त्र परमात्मा है। सृष्टिके अवसरपर परब्रह्म श्रीकृष्ण ही स्वयं दो रूपोंमें प्रकट होते

इंद्रादि देवताओं के बाद धरती पर सर्वप्रथम विभीषण ने ही हनुमानजी की शरण लेकर उनकी स्तुति की थी। विभीषण को

ऐसी बात नहीं है कि अवधपुरी में राजा दशरथ के घर श्रीराम अवतरित हुए तब से ही लोग श्रीराम का