
भगवान शिव अर्धनारीश्वर
शिव स्तुति में आये इस भृंगी नाम को आप सब ने जरुर ही सुना होगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार ये

शिव स्तुति में आये इस भृंगी नाम को आप सब ने जरुर ही सुना होगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार ये

।। चाक्षुषी विद्या ।। भगवान सूर्य प्राणियों की दृष्टि (देखने की) शक्ति के अधिष्ठातृ देवता हैं, इसलिए अच्छी नेत्रज्योति और

दिव्य दम्पति की आरती उतारो हे अलीलाला नंद जू को छौना वृषभानु की ललीदिव्य दम्पति की आरती उतारो हे अलीपद

त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव ॥

पहली बधाई हरिदास जी को होवेदूजी बधाई निधिवन राज जी को होवेतीजी बधाई सब सखियन को होवेचौथी बधाई बजे सकल

जनक जी को पाती- रामजी के धनुष तोड़ने के बाद जनक जी लग्न- पत्रिका अयोध्या भेजते है- बरात लाने के

(मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी) ब्रज में प्रकटे हैं बिहारी, जय बोलो श्री हरिदास की। भक्ति ज्ञान मिले जिनसे, जय बोलो गुरु

जय राजा राम जय सीताराम राम सारे राज्य में ढोंढी पिटवा दो, उनके राजा राम अयोध्या वापिस आ रहे हैं।

ॐ भोलेनाथ नमःॐ कैलाश पति नमःॐ भूतनाथ नमःॐ नंदराज नमःॐ नंदी की सवारी नमःॐ ज्योतिलिंग नमॐ महाकाल नमःॐ रुद्रनाथ नमःॐ

रामनामसत्य_है ” ऐसा क्यों बोला जाता है :– आइये जानते हैं……एक समय कि बात जब बाबा तुलसीदास जी अपने गांव