
“वृंदावन का इतिहास”
. “वृंदावन का इतिहास” वृंदावन तो हम सभी जाते हैं परन्तु वृंदावन के इतिहास को कम ही लोग जानते

. “वृंदावन का इतिहास” वृंदावन तो हम सभी जाते हैं परन्तु वृंदावन के इतिहास को कम ही लोग जानते

नमो राघवाय करुणावरुणालय श्रीमद्राघवेन्द्र सरकार महाप्रभु अप्राकृत और सच्चिदानन्दघन हैं। उनके नाम भी अप्राकृत और सच्चिदानन्द-स्वरूप हैं। भगवान् श्रीराम सर्वथा

मङ्गलमयी शिव स्तुति प्रतिदिन सुबह शिवलिंग पर जल, दूध अथवा पंचामृतस्नान के बाद फूल और श्रीफल अर्पित करें, तत्पश्चात शाम

श्रीधाम वृन्दावन, यह एक ऐसी पावन भूमि है, जिस भूमि पर आने मात्र से ही सभी पापों का नाश

“जब श्रीकृष्ण ने अपने कान्हा रूप को गोपियों से छुपा लिया और ‘नटवर गोपी’ बन गए अब एक अद्वितीय लीला

।। जय जय शिव- राम ।। भगवान शिव दिन-रात भगवान राम के पावन नाम का स्मरण करते रहते हैं और

पुराने समय की बात है एक आश्रम में बहुत से शिष्य रहते थे और वह सब आपस में बातें किया

नामदेव उन्हें ढूंढते हुए शिव मंदिर में पहुँचे।वहाँ देखा तो विसोबा खेचर शिवलिंग पर पाँव पसार कर सोए हुए थे।नामदेव

जब राम ने अपने गुरु से पूछा — ‘प्रभु, आपके गुरु कौन हैं? अयोध्या का राजमहल- गुरु वशिष्ठ राम को
। शिव ताण्डव स्तोत्र (शिवताण्डवस्तोत्रम्) परम शिवभक्त लंकापति रावण द्वारा गाया भगवान शिव का स्तोत्र है, मान्यता है कि एक