
शिरडी का मेला मुझसे कही छूट न जाये
शिरडी का मेला मुझसे कही छूट न जाये, क्यों गाडी लेट चलाये क्यों गाडी लेट चलाये, साई से मेरी लगन

शिरडी का मेला मुझसे कही छूट न जाये, क्यों गाडी लेट चलाये क्यों गाडी लेट चलाये, साई से मेरी लगन

देता शिरडी वाला साई शरणागत का साथ, मैं भी तेरी शरण में आया थाम ले मेरा हाथ रो रही आंखे

जीमे मर्जी एह जिन्दगी चला देवे असी साईं उते छड़ियाँ ने डोरियाँ चाहे रंक या बादशाह बना देवे असी साईं

साडी सुनले वे सैयां फर्याद वे साइयाँ तेरा की जावेगा, साडी सुनी न कोई जे गल बात ये बच्चा तेरा

साई के दर को छोड़ के सारे जग से बेगाना है, साई का दीवाना है मेरा दिल साई का दीवाना

अपनाया न किसी ने किसको दू मैं दुहाई, मुझपर किरपा करो तुम हे शिरडी के साई, मालिक है इक सबका

जदो कोई जात पुछदा ऐ मेरी औकात पुछदा ऐ, एह आँख अथुरु बरसौंदी ऐ साइयाँ वे तेरी याद आउंदी ऐ,

धन्य धन्य मेरे साई जी धन्य तेरे उपकार ने , सेवका दे नाल तेरे गुडे गुडे प्यार ने, सूंदर रूप

मुझ ना चीज पर ये कर्म कर दियाँ, मेरे साई तेरा शुकरियाँ शुकरियाँ जब से तेरा दीवाना हुआ बाबा मैं,

जो देखे सपने हो गये पुरे , लो शिरडी वाला घर में हमारे आया जी, ख़ुशी का आज नहीं है