महाभारत (Mahabharat)

विश्वरूप दर्शन योग

।। विश्वरूप दर्शन योग ।। अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्रा: सर्वे सहैवावनिपालसङ्घै:।भीष्मो द्रोण: सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यै:।। वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति

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राम नाम की महिमा

रामनवमी पर पढिये विशेष कथा जब युधिष्ठिर अपनी माता और भाइयों को साथ लिए वनवास कर रहे थे, तब उन्हें

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