
आज से प्रारंभ खरमास की पौराणिक कथा ।
खरमास को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है. भगवान सूर्यदेव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड

खरमास को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है. भगवान सूर्यदेव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड

श्रीरामः शरणं मम।लक्ष्मीनाथसमारम्भां नाथयामुनमध्यमाम्।अस्मदाचार्यपर्यन्तां वन्दे गुरुपरम्पराम्।। स सर्वं सिद्धिमासाद्य ह्यन्ते रामपदं व्रजेत्।चिन्तयेच्चेतसा नित्यं श्रीरामःशरणं मम।।१।। विश्वस्य चात्मनोनित्यं पारतन्त्र्यं विचिन्त्य च।चिन्तयेच्चेतसा

पुराने समय में एक राजा था। राजा के पास सभी सुख-सुविधाएं और असंख्य सेवक-सेविकाएं हर समय उनकी सेवा उपलब्ध रहते

।। श्लोक-शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदंब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्।रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिंवन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्।। भावार्थ-शान्त, सनातन, अप्रमेय (प्रमाणों से परे), निष्पाप,

इन्द्र उवाचऊँ नम: कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नम:।कृष्णप्रियायै सारायै पद्मायै च नमो नम:।।१।। अर्थ-देवराज इन्द्र बोले- भगवती कमलवासिनी को नमस्कार है।

इक्ष्वाकु वंश के गुरु वसिष्ठ जी ने श्री राम की वंशावली का वर्णन किया जो इस प्रकार हैःआदि रूप ब्रह्माठ जी से मरीचि का जन्म हुआ। मरीचि के

विष्णवे विष्णवे नित्यं विष्णवे विष्णवे नम:।नमामि विष्णुं चित्तस्थमहंकारगतिं हरिम।। चित्तस्थमीशमव्यक्तमनन्तमपराजितं।विष्णुमीडयमशेषेण अनादिनिधनं विभुम।। विष्णुक्षितगतो यन्मे विष्णुर्बुद्धिगतक्ष यत।यव्वार्हकारगो विष्णुर्यद्विष्णुर्मयि संस्थित:।। करोति कर्मभूतोऽसौ

श्रीगणेशाय नमः। ॐ देवानां कार्यसिध्यर्थं सभास्तम्भसमुद्भवम् ।श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये।।१।। लक्ष्म्यालिङ्गितवामाङ्गं भक्तानामभयप्रदम्।श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये।।२।। प्रह्लादवरदं श्रीशं दैतेश्वरविदारणम्।श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि

श्रीराम। एक अद्भुत कथा एक बार की बात है। बहुत दूर से ब्राह्मण संत एकनाथ महाराज का घर ढूँढ़ता हुआ

।। सोरठा-प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन।जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।। भावार्थ-मैं पवनकुमार श्री हनुमानजी को