
सत्य क्या है
एक बार गुरु नानक देव जी ने मरदाने को एक टका दिया, और कहा कि एक पैसे का झूठ ला

एक बार गुरु नानक देव जी ने मरदाने को एक टका दिया, और कहा कि एक पैसे का झूठ ला

जय राम रूप अनूप निर्गुन सगुन गुन प्रेरक सही।दससीस बाहु प्रचंड खंडन चंड सर मंडन मही।। पाथोद गात सरोज मुख

अष्टावक्र का जन्म एक महान वेदज्ञ ऋषि कहोड़ के यहाँ हुआ। कहोड़ वेदों के गहन ज्ञाता थे, परंतु स्वभाव से

हे मेरे प्रभु ! बहुत युग बीते, कब लोगे खबर? कब सुनोगे पुकार? कब कैसे मिलेगा तुम्हारा प्यार? मेरे जीवन

आदि अनादि अनंत अखंड अभेद अखेद सुबेद बतावैं,अलख अगोचर रूप महेस कौ जोगि जती-मुनि ध्यान न पावैं।आगम-निगम-पुरान सबैं इतिहास सदा

एक साधु थे उनका न कोई आश्रम न धर्मशाला न कोई ठिकाना जहाँ रात होती वही ठहर जाते और भिक्षा

एक गाँव में दो मंदिर आमने-सामने थे। एक ओर लक्ष्मीनारायण का भव्य मंदिर था, तो दूसरी ओर भगवान शिव का

बाँके बिहारी जी की अनन्य सेविका नथिया बाई वृंदावन धाम केवल ईंट–पत्थरों से बना नगर नहीं, यह प्रेम, भक्ति और

इस संसार में भगवान श्रीहरि के जितने अनन्य भक्त हुए हैं, ध्रुव उनमें से अग्रगणी हैं। विष्णु पुराण एवं भागवत

।। रामचरितमानस- बालकाण्ड ।।(शिव-पार्वती संवाद) दोहा-बहुरि कहहु करुनायतन कीन्ह जो अचरज राम।प्रजा सहित रघुबंसमनि किमि गवने निज धाम।। भावार्थ-हे कृपाधाम!