
भागवत में शुकदेवजी अब अजामिल की कथा सुना रहे है
भागवत में शुकदेवजी अब अजामिल की कथा सुना रहे है एक ब्राह्मण था अजामिल नाम का। जाति का ब्राह्मण पर

भागवत में शुकदेवजी अब अजामिल की कथा सुना रहे है एक ब्राह्मण था अजामिल नाम का। जाति का ब्राह्मण पर


श्रीपार्वतीजी ने कहाः भगवन् ! आपने सत्रहवें अध्याय का माहात्म्य बतलाया। अब अठारहवें अध्याय के माहात्म्य का वर्णन कीजिए। श्रीमहादेवजी

एक चाट वाला था। जब भी उसके पास चाट खाने जाओ तो ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख

.एक बार कबीर जी ने साहूकार से एक सौ रूपये लिए और साधू संतों पर खर्च कर दिए.. और इकरार

एक युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार की इच्छा पिता से कही. पिता ने स्वीकृति दी

भगवद्गीतासत्रहवें अध्याय की अनन्त महिमाश्रीमहादेवजी कहते हैं:- पार्वती! अब सत्रहवें अध्याय की अनन्त महिमा श्रवण करो, राजा खड्गबाहू के पुत्र

महाभारत का दृष्टान्त है । एक बार भगवान श्रीकृष्ण पांडवो के बीच बातों ही बातों में कर्ण की दानवीरता और

* *भोर मंगल आरती होने से पहले असमय, भोग का समय नहीं है। असमय श्री ठाकुर जी को भोग लगाकर

श्री क्या है श्री हरि स्तोत्र ? भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित स्तोत्र की रचना श्री आचार्य ब्रह्मानंद द्वारा