
श्री बिहारिन दास – वृंदावन के रसिक संत
जन्म:
सूरध्वज ब्राह्मण वंशी राजा मित्रसेन बादशाह के प्रधान दीवान थे। वे महान् धर्मात्मा तथा उदार थे। अतुल सम्पत्ति होने पर

सूरध्वज ब्राह्मण वंशी राजा मित्रसेन बादशाह के प्रधान दीवान थे। वे महान् धर्मात्मा तथा उदार थे। अतुल सम्पत्ति होने पर

गरुड़ देव के ये रहस्य आपको आश्चर्यचकित कर देंगे! आखिरकार भगवान विष्णु के वाहन गरूढ़ का क्या रहस्य है? क्यों

|| श्री हरि: || गत पोस्ट से आगे ……….प्रिय दूतो ! बुद्धिमान पुरुष ऐसा विचार कर भगवान् अनन्त में ही

🙏एक राजा था जिसने ने अपने राज्य में क्रूरता से बहुत सी दौलत इकट्ठा करके( एक तरह का शाही खजाना

हमे एक बात सदैव स्मरण रखनी चाहिए ,अनेकोदुखो,अभावों, कष्टों के बाद भी जीवन यापन करते हुए सृष्टि को बनाने वाले

भगवान जब किसी जीव पर कृपा करते हैं तो वे यह नहीं देखते कि उसने कितना जप, तप, पूजा-पाठ या

बाद में यह वाराणसी के नाम से प्रसिद्ध हुआ ! यह कथा इस प्रकार है :- मगध का राजा जरासंध

प्राचीन कथा के अनुसार एक बार धरती पर विश्व कल्याण हेतु यज्ञ का आयोजन किया गया। तब समस्या उठी कि

सबसे पहले लिखा है श्रीमद्भागवत।। श्रीप्रियाजी जब श्रीकृष्ण मिलन या कृष्ण वियोग मे परम उनमादिनी होती हैं उस उन्माद में

हे परम पिता परमात्मा मै अभी तुम्हें जानता नहीं हू। कैसे भगवान से मिलन होता है भगवान का असली रूप