
विचित्र आतिथ्य
महर्षि दुर्वासा अपने क्रोधके लिये तीनों लोकमें विख्यात हैं। एक बार वे चीर धारण किये, जटा बढ़ाये, बिल्वदण्ड लिये तीनों

महर्षि दुर्वासा अपने क्रोधके लिये तीनों लोकमें विख्यात हैं। एक बार वे चीर धारण किये, जटा बढ़ाये, बिल्वदण्ड लिये तीनों

उधारकी पिकनिक नहीं स्कूलके कुछ छात्रोंने पिकनिकपर जानेका प्रोग्राम बनाया और तय किया कि प्रत्येक छात्र घरसे कुछ-न कुछ खानेका

जहाँ चाह, वहाँ राह अस्सी वर्ष पूर्व उत्तरप्रदेशके गोपामऊ नामक गाँवमें एक बालकका जन्म हुआ। उसके हाथ कलाईके पाससे जुड़े

आल्सिबाइडिस नामक एक सम्पन्न जमींदार था। उसे अपनी सम्पत्ति और जागीरका बड़ा गर्व था। एक दिन सुकरातके पास जाकर उसने

बंगालके प्रसिद्ध विद्वान् श्रीविश्वनाथ शास्त्री एक बार दूसरे विद्वानोंसे शास्त्रार्थ कर रहे थे। जब विपक्षके विद्वान् शास्त्रार्थमें हारने लगे, तब

एक नया संकल्प लंदनके वालवर्ध उपनगरके अधिकांश निवासी निर्धन और अशिक्षित थे। यह अपराधियोंकी बस्ती जानी जाती थी। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयमें

छलसे किया गया कार्य सफल नहीं होता गरुड़की माता विनताको उनकी सौत कडूने छलसे अपनी दासी बना लिया था। माताको

जहाँके तहाँ मथुराके चौबेजीको भाँग बहुत प्रिय होती है। कुछ दिनों पहलेकी बात है, एक चौबेजी भाँगके नशेमें मथुरासे गोकुल

पहले समयकी बात है। सिंधु देशकी पल्लीनगरीमें कल्याण नामका एक धनी सेठ रहता था। उसकी पत्नीका नाम इन्दुमती था। विवाह

लगभग सोलह सौ वर्ष पहलेकी बात है। संत स्कालरस्टिका प्रत्येक वर्ष अपने भाई संत बेनडिक्टसे मिलने जाया करती थी, दिनभर