
“शर्तों से परे होता है प्रेम”
राधे राधे राधे राधे राधे राधे जय श्री कृष्णा एक दिन एक सन्त के घर रात चोर घुसे। घर में

राधे राधे राधे राधे राधे राधे जय श्री कृष्णा एक दिन एक सन्त के घर रात चोर घुसे। घर में

मीराबाई भक्तिकाल की एक ऐसी संत हैं, जिनका सब कुछ कृष्ण के लिए समर्पित था। यहां तक कि कृष्ण को

हरिहर एक सीधा-साधा किसान था। वह दिन भर खेतों में मेहनत से काम करता और शाम को प्रभु का गुणगान

जैसे एक ही चाबी ताले को खोलती भी है और बंद भी करती है, एक ही मन बंधन का भी

राजा दशरथ के मुख से अन्तिम शब्द राम -राम -राम -राम -राम -राम था । छह बार राम शब्द दशरथ

शिष्य का कर्तव्य है गुरु के पवित्र मुख से जो आज्ञाएँ निकले उनका पालन करना यही सनातन धर्म की मर्यादा

. महानगर के उस अंतिम बस स्टॉप पर जैसे ही कंडक्टर ने बस रोक दरवाज़ा खोला, नीचे खड़े एक देहाती

ये जगत, प्रेम को वासना ही समझ बैठा है।पर प्रेम उपासना है । प्रेम साधना है।प्रेम चेतना की उच्चतम अवस्था

बर्बरीक (खाटूश्याम) घटोत्कच के पुत्र और भीम के पोते थे. बर्बरीक भगवान शिव के एक बड़े भक्त थे. तपस्या और

मोह बाह्य आडम्बर है, किंतु प्रेमको आन्तरिक अनुभूति कहा जाता है । मोहका सांसारिक पदार्थोंसे घनिष्ठ सम्बन्ध होता है, जबकि