राम नाम छः शास्त्रो का सार

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राजा दशरथ के मुख से अन्तिम शब्द राम -राम -राम -राम -राम -राम था । छह बार राम शब्द दशरथ जी के मुख से निकलता है । सन्तो की मान्यता है कि राम वियोग मे दशरथ जी का छठा दिन था , इसलिये छः बार राम शब्द निकला । कुछ सन्तो की मान्यता है कि महराज दशरथ छठी भूमिका पर पहुँच गये थे जो आत्मा है इसलिये छः बार ही बोले ।कुछ सन्तो का विचार है कि श्रीराम नाम छः शास्त्रो का सार है । एक बात तो निश्चित है कि राम नाम और शास्त्रो का सार है , जिसने राम नाम जान लिया , उसने सब कुछ जान लिया ।चारो वेद शास्त्रो का सार उसे मिल गया ।कलियुग मे तो यही एक आधार है । कलियुग केवल हरि गुण गाहा । राम नाम छः शास्त्रो का सार है इसलिये छः बार बोले ।कुछ सन्तो की मान्यता है कि सदा के लिये आँख बन्द करने से पहले आँखे खोली तो सामने महरानी कौशिल्या , सुमित्रा और मन्त्री सुमन्त्र को सामने देखा । राजा उन तीनो व्यक्तियो को विदायी दे रहे है राम -राम कहकर । हम किसी से राम -राम करते है तो दो बार ही राम -राम निकलता है ।अतः उन तीनो को राम -राम कहा जो छः बार हुआ ।
कुछ भी हो पर राजा दशरथ अन्त समय मे छः बार राम -राम बोले ।वैसे यह अत्यन्त कठिन है ,कितने तपस्वी ज्ञानियों के मुख पर अन्त समय मे राम नाम नही आता ।जिसने इसी नाम को अपने जीवन का आधार बना लिया होगा ,जो यदा कदा नही सदा नाम संकीर्तन करता होगा उसी के मुख पर अन्त समय मे राम राम आयेगा । अन्त राम कहि आवत नाही
जिअन मरन फलु दसरथ पावा । अंड अनेक अमल जसु छावा ।।
राजा दशरथ के गुण, शील , दयालुता को याद करके सब रोने लगे । बिदाई बहुत बुरी है । आज सारा अवध विलाप कर रहा है । गुरु वशिष्ठ को संदेशा मिला , गुरुदेव मुनिमंडली के साथ पहुँचे । सुमन्त जी और माता सुमित्रा ने राम जननी को यह सूचना दी , माँ वशिष्ठ जी आयें हैं ।कौशिल्या जी का हाथ पकडकर खडा़ किया गया ।कौशिल्या गुरुदेव के चरणों पर गिर पडी़ ।प्रभू !अवध अनाथ हो गया !!!वशिष्ठ जी ने राजा के पार्थिव शरीर को देखा , मस्तक के पास खडे़ होकर वशिष्ठ जी की आँखो मे आंसू आ गये । मित्रो -सगे सम्बन्धी तो रोते ही है यदि किसी की मृत्यु पर संत रोवें , समाज रोवें , देश रोवें तो समझना कि उसकी मृत्यु सफल है । वशिष्ठ जी ने धैर्य धारण करके समयोचित ज्ञानोपदेश दिया । राजा के शरीर को तेल की नौका मे रखा गया ।दूतो को सूचना देकर कैकय देश भेजा गया भरत सत्रुघ्न को बुलाने को । दूतो को यह सख्त निर्देश दिया गया कि भूल से भी राम वन गमन ,एवं दशरथ मरण का समाचार भरत को मत देना । उनसे सिर्फ इतना कहना कि गुरुदेव ने तुरन्त बुलाया है । दूत कैकय देश को रवाना हो गये ।
सीताराम जी की कृपा एवं आप सभी सुहृद विद्वतजनो का आशीर्बाद बना रहे यही कामना है ।
श्री राम जय राम जय जय राम जय जय विघ्न हरण हनुमान

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