
भगवान शिव के कण्ठ में ‘राम-नाम’ का रहस्य
माता पार्वती भगवान शंकर से पूछती हैं- प्रभु जे मुनि परमारथबादी।कहहिं राम कहुँ ब्रह्म अनादी।। सेस सारदा बेद पुराना।सकल करहिं
माता पार्वती भगवान शंकर से पूछती हैं- प्रभु जे मुनि परमारथबादी।कहहिं राम कहुँ ब्रह्म अनादी।। सेस सारदा बेद पुराना।सकल करहिं
।। हर हर महादेव ।। भारत में बने हर एक मंदिर में आपको भगवान शिव की मूर्ति देखने को जरूर
शिवलिंग में विराजते हैं तीनों देव:-सबसे निचला हिस्सा जो नीचे टिका होता है वह ब्रह्म है, दूसरा बीच का हिस्सा
मेरे प्रिय आत्मन्! मनुष्य के जीवन में या जगत के अस्तित्व में एक बहुत रहस्यपूर्ण बात है। जीवन को तोड़ने
एक बार शरद पूर्णिमा की शरत-उज्ज्वल चाँदनी में वंशीवट यमुना के किनारे श्याम सुंदर साक्षात मन्मथनाथ की वंशी बज उठी।
महामंडेस्वर महादेव जिनका मंदिर है देहरादून से128 km दूर लाखामंडल नामक स्थान पर– लाखामंडल नाम दो शब्दों से बना है,
नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।१।। अर्थ-हे मोक्षस्वरूप, विभु, व्यापक, ब्रह्म और वेदस्वरूप, ईशान दिशा के ईश्वर
The intriguing name Pashupati means ‘the Lord of beasts’ or the ‘Lord of animals’. It derives from the Sanskrit words
परमपिता परमेश्वर देवाधिदेव महादेव नन्दी पर आरूढ़ हैं। आधार में यंत्र निर्मित है। जल-लहरी विलक्षण रूप से निर्मित हैं। यह
त्रिदेवों में शिव एक हैं. ब्रह्मदेव जहां सृष्टि के रचयिता माने गए हैं, वहीं विष्णु पालक और शिव संहारक माने