
सखी मैं कैसे होली खेलू री सांवरिया के संग,
सखी मैं कैसे होली खेलू री सांवरिया के संग,सांवरिया के संग सखी सांवरिया के संग…… कोरे कोरे कलश मँगाए उनमे
सखी मैं कैसे होली खेलू री सांवरिया के संग,सांवरिया के संग सखी सांवरिया के संग…… कोरे कोरे कलश मँगाए उनमे
होली खेल रहे नंदलाल , वृन्दावन की कुंज गलीन में,मथुरा की कुंज गलिन में गोकुल की कुंज गलीन में,होली खेल रहे
इस होली में ओ मेरे कान्हा,जरा बच–बच के रहियो,सब भर पिचकारी लायेंगे,तुम देखते रहियो,सब भर पिचकारी लायेंगे,तुम देखते रहियो,इस होली
मुरलीधर, गोपाल, कन्हैया,मत छेड़ो नंदलाल, कन्हैया। मैं गोरी सी एक गुजरिया,कब से बैठी, आय अटरिया,इत उत खोजें, बेसुध नैना,जित देखूँ
कन्हैया तोपे रंग डारेगो सखी घूँघट काहे खोले।। भरी पिचकारी तोरे माथे पे मारेमाथे पे मारे हांजी माथे पे मारेसखी
मुरलीधर, गोपाल, कन्हैया,मत छेड़ो नंदलाल, कन्हैया। मैं गोरी सी एक गुजरिया,कब से बैठी, आय अटरिया,इत उत खोजें, बेसुध नैना,जित देखूँ
राधे तेरा बरसाना इस जग से न्यारा हैहम और किधर जाएँ यही घर अब हमारा है तेरे बरसाने की श्यामा
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरि चरणन में अटको।मेरो मन वृंदावन में अटको, मेरो मन हरि चरणन में
नजर में रहते हो मगर तुम नजर नहीं आते,ये दिल बुलाये श्याम तुम्हे पर तुम नहीं आते,नजर में रहते हो
जीवन में सफलता की कुंजी है ‘सिद्ध कुंजिका’- दुर्गा सप्तशती में वर्णित सिद्ध कुंजिका स्तोत्र एक अत्यंत चमत्कारिक और तीव्र