
आहार शुद्धि जीवन सिद्धि का मूल है
।। श्री: कृपा ।। पूज्य “सद्गुरुदेव” जी ने कहा – आहार का सम्बन्ध न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य से है

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राम।। लोगोंने समझा है कि हम संसारके आदमी हैं और भगवान्की प्राप्ति बड़ी दुर्लभ, कठिन है। यह बात नहीं है।

बड़े बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे व्यक्तियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए बल्कि आत्मनिर्भर होना

।। नमो आंजनेयम् ।। महाबली रामभक्त श्रीहनुमान जी के अस्त्र-शस्त्रों में पहला स्थान उनकी गदा का है। आपको जानकर हैरानी

एक साधु थे उत्तर प्रदेश में। उनको अनेक लोग मानते थे, बड़े-बड़े राजा महाराजा उनकी सेवा में जाते थे। किसी

घटना बंगाल प्रांत की है। वर्द्धमान जिले के एक विद्यालय में, एक बालक दसवीं कक्षा में पढ़ता था। वह पढ़ने

ब्यास मे एक मीटिंग हुईबाहर एक देश से एक माता आई हुईं थी- बाबा जी आपकी हस्तीकी है साथ ही

जय जय श्री राम…. मनुष्य जीवन परमात्मा का दिया गया एक श्रेष्ठ उपहार है। जीवन में बुराई अवश्य हो सकती

कनफ्यूसियस के जमाने में चीन में दो चीनियों ने आमने-सामने दुकान खोली, होटल। एक का नाम था यिन और दूसरे

एक बार भगवान अपने एक निर्धन भक्त से प्रसन्न होकर उसकी सहायता करने उसके घर साधु के वेश में पधारे।