प्रियतम से सम्बन्ध
हम भगवान राम, कृष्ण, हरि, शिव, को कथाओं में ढुंढते है।भजन गाते हैं। रामचरितमानस, भगवद्गीता, भागवत महापुराण को पढते है। मन्दिर
हम भगवान राम, कृष्ण, हरि, शिव, को कथाओं में ढुंढते है।भजन गाते हैं। रामचरितमानस, भगवद्गीता, भागवत महापुराण को पढते है। मन्दिर

सनक सनंदन सनातन, चौथे सनत्कुमार। ब्रह्मचर्य धारण किया, हुआ प्रथम अवतार ।। वाराहरूप धरके प्रभु, हिरण्याक्ष को मार। पृथ्वी लाये

परमात्मा से मिलन मनुष्य-जन्म में ही संभव है परमात्मा ने सिर्फ इन्सान को ही यह हक़ दिया है यह मनुष्य-शरीर

समुद्र मंथन हम ग्रथों में पढते है समुद्र मंथन हमारे अन्दर ही है। सत्व रज और तम तीनो गुणों का

मिलन की तङफ के बैगर आंसू छलकते नहीं। हर क्षण प्रभु मे खोना ही भक्त का जीवन है। जितने भगवान
हृदय से ढूंढने पर ही परमात्मा मिलेंगे। संत महात्मा हमें मार्ग दिखा देंगे, पर लगन का दीपक हमें अपने आप

आत्मचिंतन करने के लिए समर्पण भाव का जागृत होना आवश्यक है परमात्मा के मै दर्शन कर लू परमात्मा कैसा है

बहुत देखा। खूब देखा। जितना देख सकती थी उतना मैंने बांके बिहारी को देखा। पर तू ही बता ऐ सखी

मन की मलिनता दो प्रकार की होती है।स्थूल मलिनता साधारण साधन तप,व्रत,अनशन आदि से यह मलिनता दूर होती है,।सूक्ष्म मलिनता

हे परमात्मा राम मै आपकी वन्दना करती हूं एक भक्त परमात्मा राम के भाव मे कैसे वन्दना करता है हे