
” निष्कामता “
जब तक व्यक्ति के भीतर पाने की इच्छा शेष है, तब तक उसे दरिद्र ही समझना चाहिए। श्री सुदामा जी

जब तक व्यक्ति के भीतर पाने की इच्छा शेष है, तब तक उसे दरिद्र ही समझना चाहिए। श्री सुदामा जी

आप छ महीने राम को भज कर देखो। मै लेखिका नहीं हूं मैंने बस मेरे अराध्य भगवान नाथ श्री राम

एक पक्षी था जो रेगिस्तान में रहता था, बहुत बीमार, कोई पंख नहीं, खाने-पीने के लिए कुछ नहीं, रहने के

जब जब वृन्दावन सुधि आवत ।हृदयाकाश विरहघन उमड़त असुवन धार नैन-भरि लावत ॥फड़क उठत प्रति रोम रोम तन, मति बौरात

क्या कभी सोचा है कि बहुत से लोग जब एक दूसरे से मिलते हैं तो आपस में एक दूसरे को

परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों की भूमि भारत के हृदय में कई ऐसे भी राज दफ़्न हैं, जो कहानियां बनकर आज

अवधपुरी में राजा दशरथ के घर श्रीराम अवतरित हुए तब से ही लोग श्रीराम का भजन करते हैं, ऐसी बात

सुंदरकांड में एक प्रसंग। “अशोक वाटिका” में जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के

एक मंत्र में पूरी रामायण का सार भगवान राम की आराधना करने के लिए रामायण में एक मंत्र बहुत ही

वस्तुतः कुछ लोगो की धारणा रहती है हम तो सदैव भगवान को अपनी पर्स मे या झोली मे रखते है