
“सच्ची पूजा का फल”
किसी नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह ग्वालिन थी उसके चार पुत्र और एक पुत्री थी। एक समय नगर

किसी नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह ग्वालिन थी उसके चार पुत्र और एक पुत्री थी। एक समय नगर

।। जय श्री महाकालेश्वर ।। गोदावरी के पावन तट पे “श्वेत” नामक एक ब्राह्मण रहते थे। जो शिवजी के अनन्य

एक बहुत बड़ा मंदिर था। उसमें हजारों यात्री दर्शन करने आते थे। सहसा मंदिर का प्रबंधक प्रधान पुजारी मर गया।

कभी सोचा है भगवान कृष्ण का स्वरूप हमें क्या सिखाता है। क्यों भगवान जंगल में पेड़ के नीचे खड़े बांसुरी

आज यमुना छठ को यमुना महारानी का प्राक्ट्य दिवस है। द्वापर युग में जब धरती पर प्रभु के प्राकट्य होने

पूज्य सद्गुरुदेव जी ने कहा – सचराचर जगत् में सर्वत्र सभी नाम रूपों में ब्रह्म भाव से अवस्थित माँ ब्रह्मचारिणी

|| श्री हरि: || चन्द्रमा अमृतमय है, उसमे शान्ति मानो चू रही है | इसी तरह भगवान् में गुण हैं,

एक चोर चोरी के इरादे से खिड़की की राह, एक घर में घुस रहा था। खिड़की की चौखट के टूटने

“वृंदावन” में एक भक्त रहते थे जो स्वभाव से बहुत ही भोले थे। उनमे छल, कपट, चालाकी बिलकुल नहीं थी।

एक बार नारदजी विचरण कर रहे थे तभ तीनों देवियां मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां पार्वती को परस्पर विमर्श