
[63]”श्रीचैतन्य–चरितावली”
।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामजगाई-मधाई की क्रूरता नित्यानन्द की उनके उद्धार के निमित्त प्रार्थना किं दु:सहं नु

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामजगाई-मधाई की क्रूरता नित्यानन्द की उनके उद्धार के निमित्त प्रार्थना किं दु:सहं नु

….सुबह-सुबह मन की भावनाओं में कृष्णा को लाकर ख्यालों में गोता लगाएं… हजारों गायों एवं ग्वाल बालों के बीच में

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामहरिदासजी द्वारा नाम-माहात्म्य हरिकीर्तनशीलो वा तद्भक्तानां प्रियोऽपि वा।शुश्रूषुर्वापि महतां स वन्द्योऽस्माभिरूत्तमः।। शोक और

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामसप्तप्रहरिया भाव दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता।यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः।। महाभारत के युद्धक्षेत्र

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामभक्तों को भगवान के दर्शन मल्लानामशनिर्नृणां नरवरः स्त्रीणां स्मरो मूर्तिमान्’गोपानां स्वजनोऽसतां क्षितिभुजां शास्ता

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामभगवद्भाव की समाप्ति अदृष्टपूर्वं हृषितोऽस्म्िा दृष्ट्वाभयेन च प्रव्यथितं मनो मे।तदेव मे दर्शय देवरूपं-प्रसीद

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामहरिदास की नाम-निष्ठा रामनाम जपतां कुतो भयंसर्वतापशमनैकभेषजम्।पश्य तात मम गात्रसन्निधौपावकोऽपि सलिलायतेऽधुना।। जप, तप,

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामअद्वैताचार्य को श्यामसुन्दररूप के दर्शन ददाति प्रतिगृह्णाति गुह्यमाख्याति पृच्छति।भुड्क्ते भोजयते चैव षड्विधं प्रीतिलक्षणम्।।

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामप्रच्छन्न भक्त पुण्डरीक विद्यानिधि तदश्मसारं हृदयं बतेदंयद् गृह्यमाणैर्हरिनामधेयैः।न विक्रियेताथ यदा विकारोनेत्रे जलं गात्ररुहेषु

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामनिमाई और निताई की प्रेम-लीला अवतीर्णों सकारुण्यौ परिच्छिन्नौ सदीश्वरौ।श्रीकृष्णचैतन्यनित्यानन्दौ द्वौ भ्रातरौ भजे।। आनन्द