
“[03]”श्रीचैतन्य–चरितावली
*।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *गुरु-वन्दना* ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्ति

*।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *गुरु-वन्दना* ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्ति

।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *इष्ट-प्रार्थना* कदा वृन्दारण्ये विमलयमुनातीरपुलिने चरन्तं

।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *मंगलाचरण* वंशीविभूषितकरान्नवनीरदाभात् पीताम्बरादरुणबिम्बफलाधरोष्ठात् । पूर्णेन्दुसुन्दरमुखादरविन्दनेत्रात्

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामबाल-लीला पंकाभिषिक्तसकलावयवं विलोक्यदामोदरं वदति कोपवशाद् यशोदा।त्वं सूकरोऽसि गतजन्मनि पूतनारे!इत्युक्तसस्मितमुखोऽवतु नो मुरारिः।। निमाई की

श्री निवासा गोविंदा श्री वेंकटेसा गोविंदा गोविंदा वैकुंठ वासा गोविंदाविमल नायका गोविंदा विमलाधीसा गोविंदा गोविंदा हरी गोविंदा वेंकटरमना गोविंदालक्ष्मी पति

.बात है प्रभु श्री कृष्ण के बाल्यकाल की। कन्हैया को माखन चोरी का बहुत शौक था।.सब गोप ग्वालो के साथ

एक गांव में गरीब ब्राह्मण था।।उसे अपनी कन्या का विवाह करना था।। उसने विचार किया कि राम कथा करने से

एक व्यक्ति अपने गुरु के पास गया और बोला, गुरुदेव, दुख से छूटने का कोई उपाय बताइए। शिष्य ने थोड़े

. महर्षि अगस्त्यजी के शिष्य सुतीक्ष्ण गुरु-आश्रम में रहकर अध्ययन करते थे। विद्याध्ययन समाप्त होने पर एक दिन गुरूजी

👇कपिलमुनि का परिचय**कपिल मुनि ‘सांख्य दर्शन’ के प्रवर्तक थे,जिन्हें भगवान विष्णु का पंचम अवतार माना जाता है। इनकी माता का