मीराबाई (Meerabai)

मीरा चरित भाग- 11

ठहरिये दादोसा! लगे हाथ एक वरदान चारभुजानाथसे और माँग लूँ। ऐसे पावन पर्व जीवनमें बार-बार नहीं आते।’- पिताके वक्षसे अलग

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मीरा चरित भाग- 10

‘अब मैं जाऊँ कुँवरसा? गिरधर गोपाल अकेले हैं..??”‘जाओ बेटी! तुम्हारी माँ तुम्हें पहुँचा आयँगी।’‘नहीं कुँवरसा! मैं चली जाऊँगी। डर-वर नहीं

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मीरा चरित भाग 9

‘वाह, तुमने तो चारणोंके समान प्रसन्न कर दिया मुझे। सच, जिस समय कड़खों और रणभेरीकी आवाजें कानोंमें पड़ती हैं। कवचकी

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मीरा चरित भाग- 8

यदि वे मुझे जलती हुई अग्निमें कूद पड़नेको कहें तो क्या मैं यह आगा-पीछा सोचूँगा कि मेरे पीछे मेरी पत्नी

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मीरा चरित भाग 7

ठाकुरजीको ही बाहर ले जाकर दिखा देती न? सारे रनिवासमें दौड़म-दौड़ मच गयी।’ ‘बीनणी! काला री गत कालो इ जाणे।

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मीरा चरित भाग -6

वहाँ जाकर झरोखेमें लकड़ीकी चौकी सीधी करके और उस पर अपनी नयी ओढ़नी बिछा करके ठाकुरजी को विराजमान कर दिया।

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मीरा चरित – भाग 5

कृष्णभक्त संत द्वारा प्रदत्त ठाकुर जी … एक बार ऐसे ही मीरा राज महल में ठहरे एक संत के समीप

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मीरा चरित भाग 4

कठिनाई उस समय हुई जब बड़ी बहन गुलाब कुँवर बाईसा ने कहा “मुंह खोलो भाई! बेटी के बाप बने हो।

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*मीरा चरित भाग 3

राव जयमल की तीन रानियां थी। इनमें से दो राजकुमारी और सोलह राजकुमार हुए। पांचवे पुत्र मुकंद दास उनके उत्तराधिकारी

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*मीरा चरित भाग -2

राव दूदा की संतति……. राव दूदा के पांच पुत्र हुए- वीरमदेव, रायमल, रायसल, रतनसिंह और पंचायण।(१) राव वीरमदेव:- राव दूदा

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